दोस्तों हमको हमेशा चिंता रहती है। हमारी संतान के मित्र कोण है। हमारी
संतान के संस्कार कैसे है। क्या आप यह चाहोगे की हमारी संतान प्रचिमी
संस्कृति के बहाव में आकर हमारे धर्म और हमारे संस्कार भूलजाये और क्या आदर
भावना भूल जाये और भविष्य में हमारे संस्कार से विमुक्त हो जाए। आज
नौकरी के लिए हम संयुक्त कुटुंब में नहीं रहे पाते इसलिए हमारी संतान को
दादा दादी की कथा और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। हमारी संतान आज लैपटॉप और
android मोबाइल से भली भाति परिचित है। इसलिए मैंने उसी माध्यम से हमारी
संस्कृति एवं विद्या बढ़ाना चाहता हूँ। आसा है की आप मेरे इस ब्लॉग को
आगे बढ़ाये
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